फूलगोभी और पत्ता गोभी के कीट एवं रोग

फूलगोभी और पत्ता गोभी के कीट एवं रोग को नियंत्रण करने के टिप्स जानें!

नमस्कार किसान भाइयो आज के लेख में हम आपको फूलगोभी और पत्ता गोभी के खेती के बारे में बताने वाले है,वैसे तो फूलगोभी और पत्ता गोभी के खेती की खेती तीनो ही सीजन में की जाती है। लेकिन रबी के सीजन में अधिक पैमाने पर गोभी की खेती होती है। लेकिन फसल में सबसे ज्यादा कीट एवं रोग की समस्या देखने को मिलती है। तो इस लेख में हम आपको फूलगोभी और पत्ता गोभी के कीट एवं रोग (Pests and Diseases of Cauliflower and Cabbage Details in Hindi) के नियंत्रण के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। 

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फूलगोभी और पत्ता गोभी के कीट एवं रोग

चलिए नीचे स्क्रॉल कीजिये और फूलगोभी और पत्ता गोभी के कीट एवं रोग के बारे में विस्तार से जानिए!

फूलगोभी और पत्ता गोभी के प्रमुख रोग | Major diseases of Cauliflower and Cabbage 

आइये किसान भाइयो अब हम अपने इस लेख में फूलगोभी और पत्ता गोभी के प्रमुख रोग (Foolgobhi aur Pattagobhi ke keet evam rog) पर विस्तार से चर्चा करते है। अब हम जानते है प्याज के प्रमुख रोगो के बारे में -

फूलगोभी और पत्ता गोभी का मृदुरोमिल आसिता (Downy Mildew) रोग

इस रोग के लक्षण सबसे पहले पौधों की पूरानी पत्तियों के निचली सतह पर एक हरे से पीले रंग के छितरे हुए धब्बे दिखाई देने लगते है। ये धब्बे अनियमित आकार के होते है बाद में यह धब्बा बढते हुए पीलें रंग से भूरे रंगों में बदल जाता है। शुरुआत में ये धब्बे पत्तियों के निचली सतह पर ही बनते है लेकिन बाद मे यह धब्बे पत्तियों की ऊपरी सतह पर भी दिखाई देने लगता है। पत्तियों के जिस स्थान पर यह धब्बे बनते है उस स्थान के ऊतक भूरे हो कर मर जाते है।

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फूलगोभी और पत्ता गोभी का मृदुरोमिल आसिता (Downy Mildew) रोग नियंत्रण 

  • मृदुरोमिल आसिता रोग के नियंत्रण के लिए जैविक कवकनाशी स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस को 1 लीटर प्रति एकड़ 200 पानी के हिसाब से छिड़काव के रूप में उपयोग कर सकते है। 
  • अगर रासायनिक उपचार की बात करे तो मेटालेक्सिल 4%+मनकोज़ेब 64% WP फफूंदनाशक की 400 ग्राम मात्रा को प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव के लिए उपयोग कर सकते है। 

फूलगोभी और पत्ता गोभी का आर्द्र गलन (Damping off) रोग 

आर्द्र गलन रोग राइजोक्टोनिया सोलेनाई नामक कवक से फैलता है,इस रोग का प्रकोप सबसे ज्यादा नर्सरी में देखने को मिलता है। इस रोग के प्रभावित नए अंकुर जमीन की सतह के स्तर के पास से तना लाल भूरे रंग का दिखाई देने लगता है, फिर बाद में रोग ग्रसित अंकुर सुख जाता है। जब नर्सरी डाल रहे हो तो घनी बीज की बुवाई न करे और साथ में ध्यान दे की जलजमाव ज्यादा न हो इन सब बातो का ध्यान रखना चाहिए।

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फूलगोभी और पत्ता गोभी का आर्द्र गलन (Damping off ) रोग नियंत्रण 

  • सबसे पहले इस बात का ध्यान रखे की जिस बीज की बुवाई कर रहे है,तो उस बीज की कार्बन्डाजिम 50% WP फफूंदनाशी को 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज  के हिसाब से उपचार करे। 
  • नर्सरी में बीज अंकुरण के 3 से 4 दिनों के बाद पौध को आर्द्र गलन (Damping off ) या कमर तोड़ रोग से सुरक्षा के लिए मेटालेक्सिल 4%+मनकोज़ेब 64% WP फफूँदनाशी के 15 से 20 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर नर्सरी में ड्रेंचिंग करे। 
  • अधिक संक्रमण होने पर थियोफीनेट मिथाइल 70% WP कवकनाशी की 400 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर पौधों के जड़ो के क्षेत्रो में डाले। 

फूलगोभी और पत्ता गोभी का अल्टरनेरिया काला धब्बा रोग  

इस रोग के लक्षण पत्तियों पर गोल-गोल भूरे धब्बे के रूप में दिखाई देते है ,जैसे - जैसे रोग बढ़ता जाता है धब्बे गहरे भूरे रंग के होकर और आकार में भी बढ़ते जाते है और सुखकर गिर जाता है।

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फूलगोभी और पत्ता गोभी का अल्टरनेरिया काला धब्बा रोग नियंत्रण 

  • अल्टरनेरिया काला धब्बा रोग के नियंत्रण के लिए जैविक कवकनाशी स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस को 1 लीटर प्रति एकड़ 200 पानी के हिसाब से छिड़काव के रूप में उपयोग कर सकते है। 
  • अगर रासायनिक उपचार की बात करे तो मेटालेक्सिल 4%+मनकोज़ेब 64% WP फफूंदनाशक की 400 ग्राम मात्रा को प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव के लिए उपयोग कर सकते है। 

फूलगोभी और पत्ता गोभी के प्रमुख कीट | Major Pest of Cauliflower and Cabbage 

आइये किसान भाइयो अब हम अपने इस लेख में फूलगोभी और पत्ता गोभी के प्रमुख कीटो ( Major diseases of Cauliflower and Cabbage ) पर विस्तार से चर्चा करते है। अब हम जानते है फूलगोभी और पत्ता गोभी के प्रमुख कीटो के बारे में -

फूलगोभी और पत्ता गोभी का माहू कीट  

माहू छोटे आकार के कीट होते है,जिसके शिशु एवं प्रौंढ़ पौधों के कोमल तनों, पत्तियों, फूलों एवं नई फलियों से रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं और साथ-साथ रस चूसते समय पत्तियों पर मधुस्राव भी करते हैं. जिस कारन पत्तियों  पर काले कवक का प्रकोप हो जाता है और फसल की प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित हो जाती है।

फूलगोभी और पत्ता गोभी की फसल को माहू कीट से बचाने के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बाते - 

  • फसल में पीले रंग के स्टिकी ट्रैप 15 प्रति एकड़ के हिसाब से लगवाए। 
  • नीम तेल का 2 से 5 मिली प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करे। 
  • फसल पर ज्यादा प्रभाव होने पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8%SL को 100 मिली प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करे। 
  • फसल पर ज्यादा प्रभाव होने पर धानुका आतंक (कार्बोसल्फान 25% ईसी) को 40 मिली/पंप के हिसाब से छिड़काव के लिए उपयोग करे। 

यहाँ हिंदी में Onion Pest Management टिप्स पढ़ें!

फूलगोभी और पत्ता गोभी डायमंड बैक मोथ कीट 

फूल गोभी और पत्ता गोभी का एक महत्तवपूर्ण कीड़ा है जो कि पत्तों के नीचे की ओर अंडे देता है। हरे रंग की सुंडी पत्तों को खाती है और उनमें छेद कर देती है यदि इसे ना रोका जाए तो 80-90 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।

फूलगोभी और पत्ता गोभी की फसल को डायमंड बैक मोथ कीट से बचाने के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बाते - 

  • फूलगोभी और पत्ता गोभी की फसल को डायमंड बैक मोथ कीट के प्रकोप दिखाई देने पर पीला चिपचिपा प्रपंच 12 से 15 प्रति एकड़. की संख्या में स्थापित करे
  • फसल पर ज्यादा प्रभाव होने पर ईमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी को 100 मिली प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करे। 
  • अधिक संक्रमण होने पर क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी को 60 मिली प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव के लिए उपयोग कर सकते है। 

फूलगोभी और पत्ता गोभी की तम्बाकू इल्ली कीट 

इस कीट की इल्लिया सबसे पहले झुंड में पत्तो को खाती है बाद में दूसरे पौधों को भी नुकसान पहुँचती है। यदि फूलगोभी की बात करे तो फूल को खाती ही है,और अपने मल से फूल को बर्बाद कर देती है।

फूलगोभी और पत्ता गोभी की फसल तम्बाकू इल्ली कीट से बचाने के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बाते - 

  • इस कीट की इल्लियाँ के नव पतंगों को पकड़ने हेतु फेरोमोन ट्रैप 8-10 प्रति एकड़ के हिसाब से खेतो में लगाना चाहिए।
  • फसल पर ज्यादा प्रभाव होने पर ईमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी को 100 मिली प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करे। 
  • अधिक संक्रमण होने पर क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% एससी को 60 मिली प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव के लिए उपयोग कर सकते है। 
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