प्याज के कीट एवं रोग नियंत्रण - BA Blog

प्याज के कीट एवं रोग नियंत्रण - यहाँ हिंदी में पढ़ें Onion Pest Management टिप्स

नमस्कार किसान भाइयो भारत में प्याज की खेती तीनो मौसम में बड़े पैमाने पर की जाती है। प्याज का उपयोग सलाद के रूप में ,सब्जियों के साथ,आचार व चटनी बनाते समय उपयोग कर सकते है तथा प्याज में कुछ औषधीय गुण भी पाए जाते है। प्याज की खेती अच्छे से करकर अच्छी कमाई भी कर सकते है.लेकिन प्याज के कीट एवं रोग नियंत्रण (Pest and Disease Control of Onion) करना बहुत जरुरी होता  है। आज के लेख में हम प्याज की फसल को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख रोगो और कीटो के बारे में विस्तार से बताने वाले है।

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प्याज के कीट एवं रोग | Onion Pests & Diseases Details in Hindi

आइये किसान भाइयो अब हम अपने इस लेख में प्याज के कीट एवं रोग नियंत्रण (Onion Pests & Diseases Details in Hindi) पर विस्तार से चर्चा करते है। अब हम जानते है प्याज के प्रमुख रोगो के बारे में - 

प्याज के फसल के प्रमुख रोग | Major Diseases of Onion Crop Details in Hindi

प्याज की फसल में अनेक प्रकार के रोग लगते है, किन्तु कुछ रोग फसल को जाय्दा नुकसान पहुंचाते है। यदि इनका सही समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल को बहुत ही छति पहुंचाते है जिससे किसानो को बहुत ही ज्यादा उपज में नुकसान उठाना पड़ता है। प्याज की फसल में लगने वाले प्रमुख रोगो के बारे में तथा उनके रोकथाम के बारे में जानते है -

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प्याज का आर्द्रगलन (डैम्पिंग आफ) रोग | Damping off disease of onion

यह रोग प्याज की पौधशाला में लगने वाला कवक जनित प्रमुख रोग है| यह रोग मुख्य रूप से पीथियम, फ्यूजेरियम तथा राइजोक्टोनिया कवकों द्वारा फैलता है। इस रोग के लक्षण जहा पर जलजमाव या बरसात ज्यादा होती है ,वहाँ पर देखने को मिलती है इस रोग की दो आवस्थाये देखने को मिलती है - पहला बीज में जैसे ही अंकुर निकलता है में सड़न रोग लगने से पौध जमीन से उपर आने से पहले ही मर जाता है। दूसरा अवस्था अंकुरण के 10-15 दिन बाद जब पौधा जमीन की सतह से ऊपर आने के बाद जमीन की सतह पर से लगे हुए स्थान पर सड़न होने से पौधा गिरकर मर जाता है, इस रोग के कवक नम और गर्म जलवायु में तेजी से बढ़ते है | 

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प्याज का आर्द्रगलन (डैम्पिंग आफ) रोग की रोकथाम | Prevention of damping off disease of onion 

प्याज की फसल को आर्द्रगलन रोग से बचाने के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बाते -

  • प्याज की नर्सरी तैयार करने के लिए स्वास्थ्य बीज का चुनाव करना चाहिए। 
  • बीज की बुवाई करने से पहले बीज को उपचारित करने के लिए कार्बन्डाजिम 50% WP को 2.5 ग्राम/किलोग्राम बीज के हिसाब से बीज उपचार करे। 
  • पौध की नर्सरी में बाविस्टीन कवकनाशी (Babstin Fungicide) के घोल को 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर 15 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करना चाहिए।

प्याज का झुलसा रोग (स्टैम्फीलियम ब्लाइट) रोग | Onion Blight Disease Details in Hindi

प्याज की फसल में लगने वाला यह रोग स्टेमफीलियम बेसिकेरियम नामक कवक द्वारा लगता है,इस रोग के लक्षण पत्तियों पर पहले छोटे-छोटे सफेद और हलके पीले धब्बों के रूप में दिखाई देते है, फिर पत्तिया ऊपर से सूखती चली जाती है,और पौधे का तथा कंदो का विकास रूक जाता है।

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प्याज का झुलसा रोग (स्टैम्फीलियम ब्लाइट) रोग की रोकथाम | Prevention of Blight disease of onion 

प्याज की फसल को झुलसा रोग (स्टैम्फीलियम ब्लाइट) रोग से बचाने के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बाते - 

  • रोगरोधी किस्मो का चुनाव करना चाहिए। 
  • फसल चक्र अपनाना चाहिए। 
  • फसल पर कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोजेब 63% डब्लूपी का छिड़काव 300 से 400 ग्राम प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर करना चाहिए। 
  • जैविक कवकनाशी में स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस का 1 लीटर प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। 

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प्याज का बैंगनी धब्बा (पर्पल ब्लाच) रोग | Purple blotch disease of onion

यह बीमारी प्याज उगाने वाले सभी क्षेत्रों में देखी जाती है। यह रोग अल्टरनेरिया पोरी नामक फंफूद से होता हैं| यह रोग प्याज की पत्तियों, तनों और डंठलों पर दिखाई देता हैं | रोग ग्रस्त भाग पर सफेद भूरे रंग के धब्बे बनते हैं, जिनका बीच का भाग बाद में बैंगनी रंग का हो जाता है| इस रोग के कारन भंडारण के समय में प्याज सड़ने की समस्या देखने को मिलती है, जिससे भारी नुकसान होता है|

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प्याज का बैंगनी धब्बा (पर्पल ब्लाच) रोग की रोकथाम | Prevention of Purple Blotch disease of onion 

प्याज की फसल को बैंगनी धब्बा (पर्पल ब्लाच) रोग से बचाने के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बाते - 

  • रोगरोधी किस्मो का चुनाव करना चाहिए। 
  • फसल चक्र अपनाना चाहिए। 
  • फसल पर कार्बेन्डाजिम 12% + मैनकोजेब 63% डब्लूपी का छिड़काव 300 से 400 ग्राम प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर करना चाहिए। 
  • फसल पर मेटालेक्सिल 4%+मनकोज़ेब 64% WP को 400 ग्राम प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर करना चाहिए। 

जैसा की किसान भाइयों हमने अपने प्याज के कीट एवं रोग (Pyaj Ke Keet Evm rogon ki List) लेख में ऊपर प्याज के विभिन्न रोगों के बारे में विस्तार से जाना है, अब हम प्याज के विभिन्न कीटों के बारे में विस्तार से जानेंगे 

प्याज के फसल के प्रमुख कीट | Major Insect of onion crop Details in Hindi 

प्याज की फसल में कई  प्रकार के किट लगते है, किन्तु कुछ किट फसल को जाय्दा नुकसान पहुंचाते है। यदि इनका सही समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो फसल को बहुत ही छति पहुंचाते है जिससे किसानो को बहुत ही ज्यादा उपज में नुकसान उठाना पड़ता है। प्याज की फसल में लगने वाले प्रमुख कीटो (Pyaj me aane vale pramukh keet or rog) के बारे में तथा उनके रोकथाम के बारे में जानते है -

प्याज का थ्रिप्स कीट | Thrips Pest of Onion Details in Hindi 

थ्रिप्स कीट के निम्फ एवं प्रौढ़ दोनों ही फसल की पत्तियों से रस चूसकर नुकसान पहुंचाते है,इस कीट से प्रभावित पत्तियों पर सफ़ेद धब्बे दिखाई देते हैं और अधिक प्रकोप होने पर पत्तिया सिकुड़ जाती है।  जिस कारन पौधे का विकास रूक जाता है तथा उपज में कमी आ जाती है। 

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प्याज के थ्रिप्स कीट का नियंत्रण | Thrips pest control Details in Hindi 

प्याज की फसल को थ्रिप्स कीट से बचाने के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बाते - 

  • फसल में नीले रंग के स्टिकी ट्रैप 15 प्रति एकड़ के हिसाब से लगवाए। 
  • नीम तेल का 2 से 5 मिली प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करे। 
  • फसल पर ज्यादा प्रभाव होने पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8%SL को 100 मिली प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करे। 

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प्याज का माहू कीट | Aphid Pest of Onion Details in Hindi 

माहू छोटे आकार के कीट होते है,जिसके शिशु एवं प्रौंढ़ पौधों के कोमल तनों, पत्तियों, फूलों एवं नई फलियों से रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं और साथ-साथ रस चूसते समय पत्तियों पर मधुस्राव भी करते हैं. जिस कारन पत्तियों  पर काले कवक का प्रकोप हो जाता है और फसल की प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित हो जाती है।

प्याज के माहू कीट का नियंत्रण | Aphid pest control Details in Hindi

प्याज की फसल को माहू कीट से बचाने के लिए कुछ ध्यान देने योग्य बाते - 
  • फसल में पीले रंग के स्टिकी ट्रैप 15 प्रति एकड़ के हिसाब से लगवाए। 
  • नीम तेल का 2 से 5 मिली प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करे। 
  • फसल पर ज्यादा प्रभाव होने पर इमिडाक्लोप्रिड 17.8%SL को 100 मिली प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करे। 
  • फसल पर ज्यादा प्रभाव होने पर धानुका आतंक (कार्बोसल्फान 25% ईसी) को  40 मिली/पंप के हिसाब से छिड़काव के लिए उपयोग करे। 

आपको प्याज के कीट एवं रोग नियंत्रण (Onion Pests & Diseases Details in Hindi) का लेख कैसा लगा यह हमें कमेंट में बताना न भूलें , और इस लेख को अपने अन्य किसान भाइयो के साथ भी जरूर शेयर करें। 

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