गन्ना पेड़ी प्रबंधन - BA Blog

गन्ने का पेड़ी प्रबंधन करना सीखें - 60 से 70 टन/ एकड़ तक उत्पादन पाएं

नमस्कार किसान भाइयो यदि आप गन्ने की खेती करते है तो यह लेख आपके लिए बहुत अधिक फायदेमंद होने वाला है,क्योकि हम आपको गन्ना पेड़ी प्रबंधन (Ganna Pedi Prabandhan Details in Hindi) के बारे में विस्तार से जानते है हम जब गन्ने की बुवाई करते है तो ओ गन्ने की पहली फसल की पहली कटाई के बाद फिर उसी बीज टुकड़ों से उत्पन्न होने वाली दूसरी फसल को पेड़ी कहते हैं। गन्ने की मुख्य फसल की अपेक्षा गन्ने की पेड़ी से कम पैदावार होती है लेकिन यदि हम अच्छे से फसल का प्रबंधन करते है तो अच्छा उत्पादन ले सकते है। 

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गन्ना पेड़ी से अधिक पैदावार पाने के प्रमुख बिंदु | Key points to get more yield from sugarcane Ratoon in Hindi

गन्ने की कटाई (Ganne Ki Katai) करने के बाद सबसे पहले खेत में बिखरी पत्तियों और खरपतवारो की अच्छे से खेतो से साफ़ सफाई करे फिर उस फसल का अच्छे से उचित तरीके से देख रेख और खाद प्रबंध ,सिचाई प्रबंध ,खरपतवार नियंत्रण आदि करना चाहिए ,ताकि गन्ना पेड़ी की फसल से भी अच्छी पैदावार मिले। 

गन्ने की कटाई का सही समय | Right Time to Harvest Sugarcane Details in Hindi

यदि गन्ने की कटाई की बात की जाये तो सबसे अच्छा समय फरवरी से लेकर अप्रैल माह का समय सबसे अच्छा माना जाता है,यदि गन्ने की कटाई (sugarcane harvesting Details in Hindi) कर रहे है तो जमीन की सतह से करनी चाहिए। क्योकि यदि हम गन्ने की कटाई अधिक ठण्ड में करते है तो कलिकाओ का फुटाव अच्छे से नहीं हो पाता है।

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गन्ने की कटाई करने के बाद फसल की देखरेख | Post-Harvest Care of the Sugarcane Crop in Hindi

गन्ने की कटाई करने के बाद गन्ना पेड़ी फसल की देखभाल करना जरुरी होता है तो निम्न बातो का ध्यान रखना चाहिए - 

  • गन्ने की कटाई करने के बाद खेतो से सुखी पत्तियों को खेत से बाहर कर दे या तो दो लाइनों के बीच की जो जगह है वहाँ पर पत्तियों को बिछाकर पत्तियों को सड़ने के लिए उसके ऊपर 1 लीटर कम्पोस्टिंग बैक्टीरिया (फ़ास्ट डी) और 100 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट डालकर फसल को पानी देना चाहिए। 
  • गन्ने की कटाई करने के बाद खेतो में बिखरी हुई पत्तियों को जलाना नहीं चाहिए क्योकि पत्तियों के सड़ने पर मिटटी में  जैविक खाद 0.5% नाइट्रोजन , 0.2% फॉस्फोरस और 0.8% पोटैशियम व मिटटी में पाए जाने वाले लाभ दायक मित्र कीटो को भी नुकसान नहीं होता है। 
  • गन्ने की कटाई करने के बाद गन्ना पेड़ी की फसल पर फफूंदजनित और कीटो के नुकसान से बचाने के लिए तथा जो कलिकाओ का फुटाव हुआ है उनका भी बढ़वार चलता रहे उसके लिए निम्न उत्पादों का छिड़काव जैसे - NPK 19:19:19 - 3 ग्राम + सुपर डी - 2 मिली + साफ़ - 2 ग्राम + मिक्स माइक्रो न्यूट्रिएंट - 1  ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर करना उचित रहेगा। 
  • गन्ने की फसल की कटाई करने के बाद मिटटी कठोर हो जाती है तो उसकी एक जुताई कर देनी चाहिए ताकि जड़ो का फैलाव अच्छे से हो। 

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गन्ना पेड़ी में अधिक पैदावार पाने के लिए खाद प्रबंधन | Fertilizer management to get more yield in sugarcane Detail in Hindi

गन्ने की फसल में गन्ना पेड़ी का अच्छे से अधिक फुटाव हो उसके लिए फसल की कटाई के 20 दिनों के अंदर में ही निम्न खाद की मात्रा को  80 किलोग्राम यूरिया, 150 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट और म्यूरेट ऑफ़ पोटाश 50 किलोग्राम अथवा 10:26:26 - 100 किलोग्राम और 50 किलोग्राम यूरिया नालियों में दे और मिट्ठी के साथ मिला दे, ताकि फसल का अच्छे से फुटाव हो। 

गन्ना पेड़ी वाले खेतो में खाली जगह को भरना | filling of empty space in sugarcane fields Details in Hindi 

गन्ने की कटाई हो जाने के बाद खेत का निरीक्षण करना चाहिए,और देखना चाहिए जहा पर ज्यादा खाली स्थान दिख रहा हो तो यानि 3-4 फ़ीट से अधिक जगह खाली हो  तो उन स्थानों पर उसी किस्म के कटिंग की उन स्थानों पर रोपाई कर देनी चाहिए। 

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गन्ना पेड़ी वाले खेतो में खरपतवार नियंत्रण  | Weed control in sugarcane fields Details in Hindi

आमतौर पर हम देखते है कि जिन खेतो में गन्ने की खेती करते उन खेतो में घास का प्रकोप जाय्दा देखने को मिलता है अगर हम घास का नियंत्रण सही समय पर नहीं करते है तो फसल के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलता है। 

अगर फसल में जायदा खरपतवार हो तो खरपतवार नियंत्रण के लिए टाटा मेट्री (मेट्रिबुज़िन 70% डब्ल्यू पी ) 400 ग्राम दवा को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। या तमर (एमेट्रिन 80% डब्लूडीजी) 1 किलोग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। 

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गन्ना पेड़ी में सिचाई प्रबंधन | Irrigation management in sugarcane Details in Hindi 

अगर गन्ने में सिचाई की बात करे तो सिंचाई की संख्या मिट्टी की प्रकार,उस क्षेत्र में पानी की उपलब्धता आदि बातो पर निर्भर करती है। यदि गर्म मौसम ,शुष्क हवा और सूखा होने से फसल में पानी की आवश्यकता को बढ़ा देता है ,तो उस समय फसल को पानी देना बहुत जरुरी होता है। लेकिन फसल की कुछ अवस्थाये जैसे - अंकुरण के बाद , वानस्पतिक शाखाओ की  वृद्धि  तथा गन्ना परिपक्वता के समय पानी फसल के लिए बहुत जरुरी होता है। 

किसान भाइयो हम आशा करते है की गन्ना पेड़ी प्रबंधन (Ganna Pedi Prabandhan Ki Jankari) के बारे में बताई गयी जानकारी आपको अच्छी लगी होगी यदि आपको बताई गयी जानकारी अच्छी लगी हो तो आप अपने आस-पास के किसान भाइयो को शेयर करे। 

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