प्याज में आर्द्र गलन रोग पहचान और नियंत्रण के बारे में जानें !

प्याज में आर्द्र गलन रोग पहचान और नियंत्रण के बारे में जानें !

प्याज में आर्द्र गलन रोग और नियंत्रण | onion farming disease control in hindi 

नमस्कार किसान भाइयों आज हम प्याज की खेती (onion farming) के बारे तथा लगने वाले प्रमुख रोगों के नियंत्रण के बारे में विस्तार से चर्चा करने वाले हैं। जिसमें हम प्याज की फसल में लगने वाले प्रमुख रोगों (damping off seedling) की पहचान और नियंत्रण के बारे में जानेंगे। 

प्याज की खेती करने वाले प्रमुख राज्य | Add states in India where onion is cultivated

भारत के प्याज (onion farming) उत्पादक राज्यो में महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, कर्नाटक, तमिलनाडू, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश एवं बिहार प्रमुख हैं।

प्याज के प्रमुख रोग | onion crop disease 

  1. आर्द्रगलन (डैम्पिंग ऑफ)
  2. बैंगनी धब्बा रोग (परपल ब्लाच)
  3. झुलसा रोग (स्टेमफीलियम ब्लाइट)
  4. मृदुरोमिल आसिता (डाउनी मिल्डयू)
  5. प्याज का कण्ड (स्मट)
  6. आधार विगलन
  7. एन्थ्रेक्नोज
  8. जीवाणु मृदु विगलन

प्याज का आर्द्रगलन रोग (डैम्पिंग ऑफ) | onion crop disease 

प्याज की फसल में आर्द्रगलन रोग (damping off) मुख्यतः प्याज की नर्सरी में लगता है, और आर्द्रगलन रोग (damping off) के लगने के प्रमुख कारण पीथियम, फ्यूजेरियम तथा राइजोक्टोनिया फंगस हैं। इस रोग का प्रकोप सबसे ज्यादा खरीफ मौसम में होता है, क्योंकि उस समय तापमान में ज्यादा आर्द्रता होती है तो यह रोग ज्यादा फैलता है और इस रोग की दो अवस्थाएं देखी जाती हैं -

पहली अवस्था -  पहली बार यह रोग बीज के अंकुर निकलने के तुरंत बाद उसमें कवक के संक्रमण होने से उसमें सड़न रोग लग जाता है जिससे पौधे जमीन से ऊपर आने से पहले ही मर जाते हैं।

दूसरी अवस्था - दूसरी बार इस रोग का संक्रमण बीज के अंकुरित होने के 10-15 दिन बाद जब पौधे जमीन की सतह से ऊपर निकलते हैं तो इस समय रोग का प्रकोप प्याज की फसल पर दिखता है। और पौधे जमीन की सतह पर से लगे हुए स्थान से सड़न कर सतह से गिरकर मर जाते हैं।

प्याज का आर्द्रगलन रोग (डैम्पिंग ऑफ) नियंत्रण | onion crop disease control 

  • बीज की बुवाई से पहले बाविस्टिन कवकनाशी (Bavistin Fungicide) से 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए। 
  • नर्सरी में आर्द्रगलन रोग के नियंत्रण के लिए बाविस्टिन कवकनाशी (Bavistin Fungicide) का 10 से 12 ग्राम प्रति पंप के हिसाब से ड्रेंचिंग (पौधे के जड़ों के पास डालें ) करना चाहिए। 
  • इस रोग के नियंत्रण के लिए रोको कवकनाशी (roko Fungicide) को 2-4 ग्राम/लीटर में मिलाकार ड्रिप या मिट्टी को भिगोना चाहिए। 
  • यदि रोग का प्रकोप ज्यादा हो तो साफ़ कवकनाशी (saaf fungicide uses) का 2 ग्राम + कसु-बी (कासुगामासीन 3% SL) 1 मिली/ लीटर में मिलाकार ड्रिप या मिट्टी को भिगोना चाहिए।
  • यदि प्याज में ज्यादा समस्या दिखे तो बायर कम्पनी का एलीएट कवकनाशी (bayer aliette) का 1.5 -2 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर ड्रिप से छोड़ें। 

किसान भाइयों यदि गर्मियों में प्याज में आर्द्र गलन रोग और नियंत्रण के बारे में यह लेख पढ़कर कैसा लगा यह हमें कमेंट में बताना न भूलें और इस लेख को अपने अन्य किसान मित्रों के साथ भी शेयर करें। धन्यवाद

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