गेंहू के प्रमुख कीट एवं रोग नियंत्रण

गेंहू के कीट एवं रोग नियंत्रण - हिंदी में जानें Pest & Disease की जानकारी!

नमस्कार किसान भाइयो आज के लेख में हम आपको गेंहू के कीट एवं रोग नियंत्रण के बारे में बताने वाले है,गेहूँ रबी सीजन की मुख्य फसल मानी जाती है।गेहूँ की खेती पुरे भारत में की जाती है,लेकिन कुछ राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के मैदानी भाग राजस्थान व मध्य प्रदेश में सबसे गेहूँ की खेती की जाती है। गेहूँ की फसल में कीट एवं रोग की समस्या का समाधान अच्छे से कर लेते है तो फसल का अच्छा उत्पादन ले सकते है। तो इस लेख में हम आपको गेंहू के प्रमुख कीट एवं रोग नियंत्रण  (Pest and Disease Control of Wheat Details in Hindi) के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

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गेंहू के कीट एवं रोग नियंत्रण | Pest and Disease Control of Wheat Details in Hindi 

आइये किसान भाइयो अब हम अपने इस लेख में गेंहू के कीट एवं रोग नियंत्रण के अंतर्गत प्रमुख रोगो ( Pest and Disease Control of Wheat Details in Hindi ) पर विस्तार से चर्चा करते है। अब हम जानते है गेंहू के प्रमुख रोगो के बारे में -

गेहूँ के प्रमुख रोग | Major diseases of Wheat  

अब हम चलते है,गेहूँ के प्रमुख रोगो (Gehun ke Pramukh Rog) की जानकारी और उनके निवारक और रासायनिक उपचार के बारे में चर्चा करते है। 

गेहूं का पत्ती रतुआ या भूरा रतुआ रोग | Wheat Leaf Rust or Brown Rust Disease  

यह रोग गेहू की फसल के शुरूआती अवस्था में देखने को मिलता है,इस रोग के कारन पत्तियों पर भूरे रंग के छोटे-छोड़े  अंडाकार आकार के धब्बे पत्तियों के निचली सतह पर बनते दिखाई देते है,कभी - कभी इस रोग का प्रभाव जायदा होने पर धब्बो का बिचला हिस्सा भूरे रंग का और किनारा कत्थई रंग का दिखाई देने लगता है। इसका रोग का प्रभाव 20 से  25 सेल्सियस तापमान पर जायदा प्रभावकारी दिखाई देता है। गेहू में इस रोग से उत्पादन पर 20-30% तक का नुकसान देखने को मिलता है,तो इस रोग का नियंत्रण समय पर करना चाहिए। 

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गेहूं का धारीदार रतुआ या पीला रतुआ रोग | Stripe rust or yellow rust disease of wheat   

गेहूँ के इस रोग के प्रारंभिक लक्षण पत्तियों के उपरी सतह पर पीले रंग की धारियों के रूप में देखने को मिलता हैं,इस रोग के कारन पत्तिया पीली पड जाती है,और पत्तियों पर का पीले पाउडर के रूप में स्पोर जमीन पर गिरने लगता है। यदि यह रोग कल्ले निकलने समय की अवस्था में आ जाता है तो फसल में बालियाँ नहीं बनती है,गेहूँ की फसल में यह रोग तापमान के बढने पर कम हो जाता है। अगर प्रकोप ज्यादा होने पर पत्तियों पर पीली धारियां काले रंग की हो जाती है | यह रोग भारत के उत्तरी क्षेत्रो में ही देखने को मिलता हैं,ध्यान रहे की ऐसे क्षेत्रो में फसल की अधिक देखभाल की आवस्यकता पड़ती है। 

गेहूं का तना रतुआ या काला रतुआ रोग | wheat stem rust or black rust disease 

गेहू में इस रोग का प्रभाव जैसे तापमान 20 डिग्री सेंटीग्रेड से अधिक होता जाता है, तो इस रोग के लक्षण तने तथा पत्तियों पर भूरे या काले रंग के स्पोर के रूप में दिखाई देने लगता है। इस रोग का प्रकोप अधिकतर दक्षिण भारत के क्षेत्रों में अधिक देखा जाता है | अब अगर उत्तरी भारत की बात करे तो यह रोग फसल पकने के समय पहुँचता है | इसलिए इसका रोग का प्रभाव ज्यादा नहीं होता है |

गेहूँ का कंडुआ रोग | loose smut disease of wheat crop 

गेहूँ की फसल में कंडुआ रोग के लगने से बालियों में दानो के स्थान पर काले चूर्ण दिखाई देते है। जब इस रोग का प्रभाव ज्यादा हो जाता है तो पूरी बालियां रोग ग्रसित होकर समाप्त हो जाती है। फसल से फफूंद के बीजाणु हवा में झडऩे से स्वस्थ बालियाँ भी संक्रमित हो जाती है। यह एक बीज जनित रोग है। इसलिए बीजोपचार करना जरुरी माना जाता है।

गेंहू के रोग का निवारक उपाय | Preventive measures for wheat diseases 

फसल के बुवाई से पहले कुछ ध्यान देने योग्य प्रमुख बाते जिनका फसल उगाते समय ध्यान रखना चाहिए -

  • प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
  • फसल चक्र अपनाना चाहिए 
  • देर से बुवाई नहीं करनी चाहिए 
  • बीज का उपचार करके बुवाई करनी चाहिए 
  • प्रभावित पौधों के अवशेषों को खेत से निकाल कर नष्ट कर दें।
  • प्रमाणित बीजों का उपयोग करें।
  • खेत की साफ-सफाई पर ध्यान दें।

गेंहू के रोगो का रासायनिक नियंत्रण | Chemical control of wheat Diseases - 

  • सबसे पहले गेहूँ के बीजो की बुवाई से पहले विटावैक्स पावर (कार्बोक्सिन + थीरम) का 2.5 से  3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करके बोना चाहिए। 
  • रोग की शुरूआती अवस्था पर मैनकोजेब 75% डब्ल्यूपी का  600 ग्राम / एकड़ 200 लीटर पानी के हिसाब से उपयोग करे। 
  • यदि रोग का प्रभाव ज्यादा छेत्रो में दिख रहा हो तो हेक्साकोनाज़ोल 4% + ज़िनेब 68% WP को 400 ग्राम / एकड़ 200 लीटर पानी के हिसाब से फसल पर छिड़काव के लिए उपयोग करे। 
  • अगर बहुत ज्यादा रोग की समस्या फसल पर दिखाई दे रही हो तो इस रसायन का उपयोग थियोफनेट मिथाइल 70% w/w को 0.5 ग्राम / लीटर पानी फसल पर छिड़काव के लिए उपयोग करे।
  • फसल के आखरी समय में जो रोग लगते है उस समय  प्रोपिकोनाज़ोल 25% ईसी को  200 ग्राम / एकड़ 200 लीटर पानी का छिड़कव बहुत ज्यादा लाभकारी साबित होता है। 

प्रोडक्ट्स का नाम 

मार्केट रेट 

भारतॲग्री रेट 

विटावैक्स पावर

₹246  

₹199 

अवतार

₹618 

₹531 

रोको

₹875 

₹ 735

वेस्पा 

₹ 952

₹685


आइये किसान भाइयो अब हम अपने इस लेख में गेंहू के किट एंव रोग नियंत्रण के अंतर्गत प्रमुख कीटो ( Pest and Disease Control of Wheat Details in Hindi ) पर विस्तार से चर्चा करते है। अब हम जानते है गेंहू के प्रमुख कीटो के बारे में -

गेहूँ के प्रमुख कीट | Major pests of Wheat Hindi me Jankari

अब हम चलते है, गेहूँ के प्रमुख कीटो (Gehun Ke Pramukh Keeton Ki Jankari) की जानकारी और उनके निवारक और रासायनिक उपचार के बारे में चर्चा करते है। 

गेहूँ का माहू कीट | Wheat Aphid Details in Hindi

माहू हरे रंग का रस चूसक कीट होता है जिसके शिशु एवं प्रौढ़ पत्तियों एवं हरी बालियों से रस चूसते है और मधुश्राव छोड़ते है जिस कारन उस जगह पर काली फफूँदी उग जाती है जिससे प्रकाश संश्लेषण में बाधा आती है पत्तिया पिली पड़कर सुख जाती है।

गेहूँ का गुलाबी तना छेदक | Pink Stem Borer of Wheat  

यह आमतौर पर नए पौधे की अवस्था में फसल पर हमला करती है,इसका लार्वा नए पौधे के तने के अंदर छेद कर देता है और यह मुख्य तने को नुकसान पहुंचाता है जिसके कारन पौधे में  डेड हार्ट की समस्या हो जाती है।

गेहूँ के कीटो का निवारक उपाय | Preventive Measures for Wheat Pests 

गेहूँ की फसल में  कीट नियोजन के लिए कुछ निवारक उपाय का भी उपयोग कर सकते है। कुछ बिन्दुओ के द्वारा - 

  • सही समय पर बीज की बुवाई करे 
  • फसल चक्र अपनाना चाहिए 
  • प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
  • स्टिकी ट्रैप और फेरोमोन ट्रैप का उपयोग कर सकते है। 
  • नीम तेल का छिड़काव करे 2 मिली /लीटर पानी 
  • वर्टिसिलियम लेकेनी पर्ण आवेदन के लिए - 2.5 मिली / लीटर

प्रोडक्ट्स का नाम 

मार्केट रेट 

भारतॲग्री रेट 

नीम का तेल

₹465

₹379

डॉ. बैक्टो वर्टिगो

₹680

₹550


गेहूँ के कीटो का रासायनिक नियंत्रण | Chemical control of Wheat Pests  

अब कुछ रसायन के बारे में चर्चा करते है,जिनका उपयोग फसल से कीटो के नियंत्रण के लिए उपयोग कर सकते है

  • अगर फसल में चूसक कीट और इल्लियों का प्रकोप दिखना शुरू हुआ हो तो कार्बोसल्फान 25% ईसी का उपयोग 40 मिली/पंप की मात्रा के अनुसार छिड़काव करना जरुरी होता है। 
  • अब बात करते है दूसरे कीटनाशक रसायन थियाक्लोप्रिड 240 एससी (21.7% डब्ल्यू /डब्ल्यू) के बारे में जिसके अंदर भी चूसक कीट और इल्लियों के खात्मे का गुण पाया जाता है को 1 मिली/लीटर पानी के अनुसार छिड़काव करना जरुरी होता है। 
  • अगर कीट का प्रकोप बहुत ज्यादा दिख रहा हो तो कीटनाशक क्लोरपाइरीफॉस 50% + साइपरमेथ्रिन 5% ईसी को  2 मिली/लीटर पानी की मात्रा में घोल कर छिड़काव करे। 

प्रोडक्ट्स का नाम 

मार्केट रेट 

भारतॲग्री रेट 

आतंक 

₹1320

₹1226

अलांटो 

₹910

₹839

हमला 550

₹1250

₹958


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Apke sujhaav bahut hi achhe lagate hai aur jankari dene ke liye dhanyvad

Manoj Rana

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