soybean illi ki dawai

soybean illi ki dawai: सोयाबीन में इल्ली नियंत्रण की दवा

किसान भाइयों नमस्कार, स्वागत है BharatAgri Krushi Dukan वेबसाइट पर। आज हम जानेंगे सोयाबीन की फसल में इल्लियों के नियंत्रण की दवा (soybean illi ki dawai) कोन सी है, सोयाबीन की फसल को प्रभावित करने वाले सभी कीटों (Soybean crop insect) की सम्पूर्ण जानकारी, सोयाबीन की फसल में कीटों (Soybean crop insect symptoms) के लक्षण और सोयाबीन की फसल में लगने वाले सभी कीटों का नियंत्रण और सम्पूर्ण जानकारी।  

सोयाबीन एक महत्वपूर्ण फसल है जिससे पूरे विश्व में पौधों की उगाई जाती है। इसमें प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं। हालांकि, सोयाबीन की फसलें अक्सर इल्लियों और कैटरपिलर जैसे कीटों के हमले से प्रभावित होती हैं, जो फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। कैटरपिलर और इल्लियों पौधों की पत्तियों और तनों को खा जाते हैं, जिससे पैदावार में कमी होती है और फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस लेख में, हम कुछ तरीके देखेंगे जिनसे सोयाबीन की फसल में इल्लियों का नियंत्रण किया जा सकता है।


सोयाबीन की फसल में लगने वाले कीटों के नाम | Soybean Insect Name -

1. सफेद मक्खी (Whitefly)

2. हरा तेला (Green Semilooper)

3. थ्रीप्स (Thrips)

4. सोयाबीन फली छेदक  (Soybean Pod Borer)

5. सोयाबीन सेमीलूपर (Soybean Semilooper)

6. सोयाबीन लीफमाइनर  (Soybean leaf Miner)

7. सोयाबीन लीफहोपर (Soybean Leafhopper)

8. सोयाबीन गर्डल बीटल (Soybean girdle beetle)

9. सोयाबीन तना छेदक (Soybean stem Borers)

10. सोयाबीन एफीड्स (Soybean Aphids)

 

1. सफ़ेद मक्खी  (Whitefly) -

लक्षण -

- पत्तियों के निचे की और सफ़ेद रंग कीट दिखाई देते हैं।  

- यह कीट पत्तियों का रस चूसते हैं।  

- इन कीटों के कारण पत्तियां पिली हो जाती हैं।  

- सफ़ेद मक्खी के कारण सोयाबीन की फसल में वायरस की समस्या आती हैं।  

- इस समस्या के कारण फसल की वृद्धिं नहीं हो पाती हैं।  


नियंत्रण -

IFC नीम ऑइल (10000 PPM) - 250 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

डॉ. बैक्टोज़ ब्रेव-ब्यूवेरिया बैसियाना, जैव कीटनाशक- 400 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

धानुका धनप्रीत (एसिटामिप्रिड 20% एसपी) कीटनाशक - 80 ग्राम प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

बायर कॉन्फिडोर (इमिडाक्लोप्रिड17.8% SL) - 100 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

यूपीएल उलाला (फ्लोनिकैमिड 50% डब्ल्यूजी) - 80 ग्राम प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  


2. सेमीलूपर (Soybean Semilooper) -

लक्षण -

- सेमीलूपर सोयाबीन की फसल में अगस्त से सितम्बर के महीनों में आक्रमण करते हैं। 

- सेमीलूपर कीट की इल्लियां पौधों की पत्तियों को खाकर नुकसान पहुंचाती हैं। 

- अधिक प्रकोप होने पर यह कोमल पत्तियों और पत्तियों की नसों को छोड़कर शेष सभी हरे भागों को खाकर नष्ट कर देती है।

- ज्यादा प्रभाव होने पर यह कीट पुरे पौधों की नुकसान पहुँचती हैं।  

- सेमीलूपर कीट के कारण प्रति एकड़ 4 क्विंटल तक उत्पादन में नुकसान होता है।  


नियंत्रण -

IFC नीम ऑइल (10000 PPM) - 250 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

सिंजेंटा अलिका कीटनाशक (थियामेथोक्साम 12.6% + लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 9.5% ZC)  - 80 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

धानुका ईएम1 (एमेमेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी) - 80 ग्राम प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

- सिंजेंटा एम्प्लिगो (क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 09.30% + लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 04.60% ZC) कीटनाशक - 100 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

- FMC कोराजेन (क्लोरैंट्रानिलिप्रोल, 18.5% w/w) कीटनाशक - 60 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  


3. गर्डल बीटल (Soybean girdle beetle) -

लक्षण -

- इस कीट की सुंडी मुलायम शरीर और काले सिर के साथ सफेद रंग की होती हैं। 

- सबसे पहले मादा कीट पौधे के तने या शाखा पर ये दो चक्र बनाती है| 

- निचले चक्र के पास एक छेद बनाकर पौधे के अंदर एक हल्के पीले कलर का अंडा देती है | 

- दो चक्रों के बीच के हिस्से को जब खोला जाता है तो यह अंडा साफ़ - साफ़ दिखाई देता है| 

- चक्र बनाने के कारण चक्रों से ऊपर वाले पौधे का भाग मुरझाकर सुख जाता है, जो कि चक्र भृंग होने का सूचक हैं |

- कुछ दिनों के बाद अण्डे में से इल्ली बाहर निकलकर पौधे के अंदर के भाग को खा कर उसे खोकला कर देती है | 

- जिसके परिणाम स्वरुप सोयाबीन की फलियों की संख्या एवं पैदावार में विपरीत प्रभाव पड़ता है |

- पूरी तरह विकसित इल्ली सोयाबीन के पौधे को अन्दर से काट कर गिरा देती है . 


नियंत्रण -

IFC नीम ऑइल (10000 PPM) - 250 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

बायर सोलोमन कीटनाशक (बीटा-साइफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड 300 ओडी )-  150 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

सिंजेंटा अलिका कीटनाशक (थियामेथोक्साम 12.6% + लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 9.5% ZC)  - 80 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

- धानुका ईएम1 (एमेमेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी) - 80 ग्राम प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  

सिंजेंटा एम्प्लिगो (क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 09.30% + लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 04.60% ZC) कीटनाशक - 100 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।


FAQ | बार - बार पूछे जाने वाले सवाल -

1. सोयाबीन में इल्ली के लिए सबसे अच्छी दवाई कौन सी है?

- सोयाबीन की फसल में इल्लियों के नियंत्रण के लिए सबसे बेस्ट दवा सिंजेंटा एम्प्लिगो (क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 09.30% + लैम्ब्डा साइहलोथ्रिन 04.60% ZC) कीटनाशक है।  


2. इल्ली मारने की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?

- सोयाबीन की फसल में इल्ली के नियंत्रण के लिए सबसे बेस्ट दवा FMC कोराजेन (क्लोरैंट्रानिलिप्रोल, 18.5% w/w) कीटनाशक - 60 मिली प्रति एकड़ 150 लीटर पानी में डाल कर छिड़काव करें।  


3. सोयाबीन का छिड़काव कब करना चाहिए?

- सोयाबीन की फसल में छिड़काव करने का सबसे उपयुक्त समय फसल की विकास की अवस्था पर निर्भर करता है जैसे - फूलों की विकाश अवस्था, ज्यादा बारिश या कम बारिश, फसल की खराब स्थिति, अत्यधिक गर्मी या ठंडी,  रोगों और कीटों की समस्या अनुसार आदि।  


4. सोयाबीन में कोराजन कब डालें?

- सोयाबीन में कोराजन का उपयोग फसल की स्थिति और पौधों की विकास अवस्था पर निर्भर करता है।कोराजन का उपयोग पौधों की विकासावस्था के दौरान किया जा सकता है, जब पौधे 20-25 दिन के होते हैं। इस समय पर कोराजन का उपयोग करने से पौधों की मजबूती बढ़ती है और वे प्रतिरक्षा शक्ति में वृद्धि करते हैं।


5. खेती में कीटनाशकों का बार-बार प्रयोग करना क्यों जरूरी होता है?

- फसल में आने वाले विभिन्न प्रकार के कीटों के संघर्ष के लिए, कीटनाशकों का बार-बार प्रयोग करना जरूरी होता है ताकि उनकी आबादी को नियंत्रित किया जा सके।


Conclusion | निष्कर्ष -

इस लेख में हमने देखा कि सोयाबीन की फसल में इल्लियों और कीटों के हमले को कैसे रोका जा सकता है। सफेद मक्खी, सोयाबीन सेमीलूपर, और सोयाबीन गर्डल बीटल जैसे कीटों के लक्षण और नियंत्रण के तरीकों का विस्तार से जानकारी दी गई है। इन कीटों के खिलाफ आवश्यक नियंत्रण और उपायों के बारे में भी चर्चा की गई है, जिनसे सोयाबीन की फसल की सुरक्षा की जा सकती है।

यह महत्वपूर्ण है कि किसान भाइयों को अपनी सोयाबीन की फसल में कीटों के लक्षणों की समझ और सटीक पहचान की अवश्यकता होती है, ताकि वे सही समय पर नियंत्रण के उपाय अपना सकें। इसके अलावा, उचित रूप से पूर्वानुमान और आवश्यक उपायों का पालन करने से सोयाबीन की पैदावार में वृद्धि हो सकती है और फसल की गुणवत्ता भी बनी रह सकती है। इस लेख के द्वारा, हमने सोयाबीन की फसल में कीटों के नियंत्रण के लिए विभिन्न उपायों की जानकारी प्राप्त की है, जो कि किसानों को उनकी फसल की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं।


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Author | लेखक

भारतअ‍ॅग्री कृषि डॉक्टर

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