Control leaf spot disease in chilli and tomato crop with M - 45 fungicide

M - 45 कवकनाशी से करें मिर्च और टमाटर की फसल में पत्ती धब्बा रोग का नियंत्रण

किसान भाइयों जैसे कि आप सभी को पता ही होगा मिर्च और टमाटर की खेती सभी राज्यों में की जाती है । और इन फसलों से प्रति एकड़ अच्छा उत्पादन लेकर किसान अपनी आय को बढ़ाते हैं। मिर्च और टमाटर की फसल जितने मुनाफे वाली है उसी के साथ किसानों को इन फसलों से अच्छा उत्पादन लेने में बहुत सारी समस्या का सामना करना पड़ता है। फसल में आने वाली समस्या जैसे - कीट, रोग और इसी के साथ उचित पोषक तत्वों की कमी जिससे प्रति एकड़ उत्पादन कम निकलता है।  

  • मिर्च और टमाटर की फसल में आने वाले कीट जैसे - सफ़ेद मक्खी, माहु, तैला, थ्रिप्स, फल छेदक इल्ली, तना छेदक इल्ली, कटवर्म, नेमाटोड, तम्बाकू इल्ली आदि। मिर्च और टमाटर की फसल में आने वाले रोग जैसे - सीडलिंग ब्लाइट, डम्पिंग ऑफ, उखटा रोग, लीफ स्पॉट, अगेती और पछेती झुलसा रोग, फल सड़न रोग आदि।  
  • आज के इस लेख में हम जानेंगे की आप कैसे कर सकते हैं, Indofil M-45 Fungicide से मिर्च और टमाटर की फसल में लगने वाले पत्ती धब्बा (Leaf spot disease) का नियंत्रण, Indofil M-45 Fungicide Dose और इसी के साथ पत्ती धब्बा रोग के फसल में लझण, रोग का प्रभाव और सम्पूर्ण नियंत्रण।  

पत्ती धब्बा रोग | Leaf spot disease 

पत्ती धब्बा रोग, यह फफूंद या फंगस के माध्यम से होने वाला प्रमुख रोग है, पत्ती धब्बा रोग मिर्च और टमाटर की फसल के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की फसलों जैसे सब्जीवर्गीय, फलवर्गीय, फुलवर्गीय साथ ही अनाज और  दाल वाली फसलों में भीइसका प्रभाव देखा जाता है।  

पत्ती धब्बा रोग के लक्षण | Symptoms of Leaf Spot Disease

  1. पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, इन धब्बों का व्यास 2 सेंटीमीटर होता हैं।  
  2. यह धब्बे गोलाकार होते हैं और बाहरी किनारों से बैंगनी रंग के दिखाई देते हैं।  
  3. पत्ती धब्बा रोग की समस्या ज्यादा होने पर यह धब्बे पूरी पत्तियों पर फ़ैल जाते हैं।
  4. इस रोग के कारण पौधें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया नहीं कर पाते हैं, जिसके अभाव में पौधें आपने भोजन नहीं बना पाते हैं।  
  5. पत्ती धब्बा रोग धीरे-धीरे पूरी पत्तियों को संक्रमित कर देते हैं।  
  6. रोग का प्रभाव ज्यादा होने पर पत्ती धब्बा रोग पौधों के तनों के साथ फलों को भी प्रभावित करता है । 
  7. इस रोग के अधिक प्रभाव से पौधों की मृत्यु हो जाती है।   
  8. पत्ती धब्बा रोग के कारण प्रति एकड़ उत्पादन 40 -60% तक काम होता है।  

M-45 फफूंदनाशी से पत्ती धब्बा रोग का नियंत्रण करें  | Control leaf spot disease with M-45 fungicide.

आइये जानते हैं M 45 फफूंदनाशी कैसे करता है मिर्च और टमाटर की फसल से पत्ती धब्बा रोग का नियंत्रण - 

Indofil M-45 (मैनकोज़ेब 75% WP) एक डाइथियोकार्बोनेट-आधारित संपर्क कवकनाशी है, जो कवक के विकास और रोग के प्रसार को रोकता है। यह कवक में एंजाइमों की गतिविधि को कम करता है, जिससे ऊर्जा उत्पादन कम हो जाता है और अंततः कवक की मृत्यु हो जाती है।

मैनकोज़ेब एक गैर-प्रणालीगत डाइथियोकार्बोनेट फसल में उपयोग किये जाने वाला एक कवकनाशी है, जो संपर्क में आने पर कई साइटों की रक्षा करता है। आप को बता दें कि  यह दो अन्य डाइथियोकार्बोनेट्स से बना है जैसे - मानेब और ज़िनेब। 

यह एंटीफंगल गुणों के साथ एक व्यापक स्पेक्ट्रम कवकनाशी है। जब उत्पाद हवा के संपर्क में आता है, तो यह फंगीटॉक्सि बन जाता है और यह आइसोथियोसाइनेट में परिवर्तित हो जाता है, जो फंगल एंजाइमों में सल्फहाइड्रील (SH) समूहों को रोकता है।

इंडोफिल एम- 45 कवकनाशी के उपयोग के फायदे | Benefits of using Indofil M- 45 fungicide

  1. यह एक मल्टीसाइट एक्शन वाला एक व्यापक-स्पेक्ट्रम कवकनाशी है, जो फाइकोमाइसेट्स, उन्नत कवक और कवक के अन्य समूहों के कारण होने वाली बीमारियों की एक विस्तृत श्रृंखला को नियंत्रित करता हैं।  
  2. संक्रमित फसलों में इसका उपयोग छिड़काव, नर्सरी ड्रेंचिंग, और विभिन्न प्रकार के बीज उपचार के लिए किया जाता है।
  3. प्रतिरोध विकसित होने के जोखिम के बिना इसे कई वर्षों तक बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है। 
  4. प्रतिरोध विकास को रोकने और/या स्थगित करने के लिए प्रणालीगत कवकनाशी के साथ संयोजन में उपयोग करने के लिए यह सबसे अच्छा कवकनाशी है
  5. रोग नियंत्रण के अलावा, यह फसलों को मैंगनीज और जिंक की मात्रा प्रदान करता है, जिससे पौधे हरे और स्वस्थ रहते हैं।
  6. यह पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नहीं है।

इंडोफिल एम- 45 कवकनाशी का उपयोग की जाने वाली फसलें |  Crops Used for Indofil M- 45 Fungicide

इंडोफिल एम- 45 कवकनाशी का उपयोग आप निम्न फसलों में कर सकते हैं -  

गेहूं, मक्का, धान, ज्वार, आलू, टमाटर, मिर्च, प्याज, साबूदाना, फूलगोभी, मूंगफली, अंगूर, अमरूद, केला, सेब, जीरा आदि सभी फसलों में इसका उपयोग किया जाता है।  

इंडोफिल एम- 45 कवकनाशी से रोगों का नियंत्रण | Indofil M- 45 Fungicide Dose 

इंडोफिल एम- 45 कवकनाशी का फसल में उपयोग करने से निम्न रोग नियंत्रित होते हैं - 

भूरा और काला रतुआ, झुलसा, पत्ता झुलसा, कोमल फफूंदी, ब्लास्ट, पत्ती का धब्बा, अगेती झुलसा, पछेती झुलसा, बक आई रॉट, डैम्पिंग ऑफ, फ्रूट रोट, कॉलर रोट, टिक्का रोग और जंग, कोणीय पत्ती का धब्बा, एन्थ्रेक्नोज, सिगार एंड रोट, टिप रोट, सिगाटोका लीफ स्पॉट, स्कैब एंड सूटी ब्लॉच एवं ब्लाइट आदि।  

इंडोफिल एम- 45 कवकनाशी की उपयोग मात्रा | Indofil M- 45 Fungicide Dose 

  • 4 ग्राम/लीटर पानी
  • 60 ग्राम/पंप (15 लीटर पंप )
  • 600 ग्राम/एकड़ छिड़काव करें
  • बीजोपचार - 3 ग्राम/किलो बीज
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