बायोस्टेट रोको कवकनाशी के छिडकाव,फायदे और डोज़ के बारे में जानें।

बायोस्टेट रोको कवकनाशी के छिडकाव,फायदे और डोज़ के बारे में जानें।

उकठा रोग के लक्षण और नियंत्रण | Wilt Disease Symptoms and Control details in hindi

नमस्कार किसान भाइयों आज के लेख में हम जानेंगे Wilt Disease की पहचान, लक्षण और उनके नियंत्रण के बारे में विस्तार से तथा किस तरह से बायोस्टेट रोको कवकनाशी (roko fungicide) से उकठा या विल्ट रोग को नियंत्रित कर सकते है। क्योंकि इस रोग के प्रकोप से पूरी की पूरी फसल नष्ट हो जाती है, विल्ट रोग या उकठा रोग का प्रमुख कारक फ्यूजेरियम ऑक्सीस्पोरम नामक फफूँद होता है।

विल्ट रोग या उकठा रोग की पहचान | identification of wilt disease - 

उकठा रोग एक मृदाजनित तथा बीजजनित रोग है। इस रोग का प्रभाव फसल पर किसी भी अवस्था में हो सकता है,यह रोग बदलते मौसम के साथ और एक ही खेत में बार-बार एक ही फसल बोने से ज्यादा फैलता हैं। शुरुआत में उकठा या विल्ट रोग का प्रभाव खेत के छोटे-छोटे टुकड़ों मे दिखाई देता है। इस रोग की शुरुआत मे पौधे की ऊपरी पतियां मुरझा जाती हैं, और धीरे-धीरे पूरा पौधा सूखकर मर जाता है। अगर ध्यान से पौधे के जड़ों के पास के तने को चीरकर देखने पर वाहक ऊतकों मे कवक जाल धागेनुमा काले रंग की संरचना के रूप मे दिखाई देता है। उकठा या विल्ट रोग से ग्रसित पौधे की फलियाँ व बीज सामान्य पौधें की फलियाँ व बीज की तुलना में सामान्यतया छोटें, सिकुड़े व बदरंग दिखाई पड़ते लगते हैं।

अब हम विल्ट रोग के नियंत्रण के लिए उपयोग किए जानें वाले रोको फफूंदनाशक (roko fungicide) के बारे में चार्ट के माध्यम से जानते है - 

उत्पाद का नाम

बायोस्टेट रोको कवकनाशी (Roko Fungicide)

तकनीकी नाम 

थियोफानेट मिथाइल 70% डब्ल्यू /डब्ल्यू

लक्षित रोग 

पाउड्री मिल्ड्यू, स्कैब, रिंग रोट, उकठा, डंपिंग ऑफ, तना सड़न , पत्ती धब्बा , एन्थ्रेक्नोज, रतुआ, ब्लास्ट, शीथ ब्लाइट, फल सड़न ,काला सड़ांध, कंद सड़न 

छिड़काव मात्रा/एकड़ 

पर्ण स्प्रे: 200-250 ग्राम / एकड़, बीज उपचार: 2 से 3 ग्राम / किग्रा बीज

प्रमुख फसलें 

मिर्च, आलू, टमाटर, धान, पपीता, सेब, लौकी, अंगूर,अन्य फसलें 

क्रिया विधि 

प्रणालीगत, सुरक्षात्मक और उपचारात्मक कार्रवाई

कंपनी का नाम

बायोस्टैड इंडिया लिमिटेड


रोको फफूंदनाशक के कार्य | Functions of Roko Fungicide details in Hindi - 

अब हम Roko Fungicide के बारे में कुछ बिंदुओं के माध्यम से जानेंगे - 

  • रोको एक प्रणालीगत कवकनाशी हैं, जो पौधे द्वारा अवशोषित होकर और प्रणाली में स्थानांतरित हो जाता है।
  • रोको कवकनाशी में निवारक नियंत्रण पाया जाता है जो रोग के संक्रमण को बढ़ने से रोकता है।
  • रोको कवकनाशी उपचारात्मक नियंत्रण के लिए उपयोग करने पर कवक रोगों की संख्या को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी है। रोको सेब पर पपड़ी और अंगूर पर एन्थ्रेक्नोज के खिलाफ बहुत अच्छा उपचारात्मक प्रभाव दिखाता है।

बायोस्टैड रोको फफूंदनाशक के उपयोग के फायदे | Benefits of using Biostadt Roko fungicide

अब हम Roko Fungicide के उपयोग से होने वाले फायदों के बारे में जानेंगे - 

  • रोको एक व्यापक स्पेक्ट्रम प्रणालीगत कवकनाशी है और इसमें निवारक, उपचारात्मक और प्रणालीगत कवकनाशी गुणों का एक अनूठा संयोजन है।
  • एन्थ्रेक्नोज, सर्कोस्पोरा लीफ स्पॉट, पाउडरी मिल्ड्यू, वेंटुरिया स्कैब, स्क्लेरोटिनिया रोट,बोट्रीटिस और फुसैरियम विल्ट के लिए बिल्कुल सही समाधान।
  • एस एटम के कारण बढ़ा हुआ फाइटोटोनिक और एंटिफंगल प्रभाव।
  • त्वचा/आंखों में जलन और कम स्तनधारी विषाक्तता नहीं।
  • जल्दी और समान रूप से पानी में घुल जाता है।

Roko Fungicide उपयोग विधि | Roko Fungicide Usage Method - 

अब हम Roko Fungicide के उपयोग विधि के बारे में जानेंगे - 

  • पत्तियों पर छिड़काव के लिए 250 से 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए तथा प्रति लीटर पानी में 0.5 ग्राम के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए।
  • बीज उपचार के लिए 2 से 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करना चाहिए।
  • रोपा उपचार के लिए रोको कवकनाशी का 1 से 1.5 ग्राम प्रति लीटर में घोल बनायें और रोपे को डुबो कर उपचारित करें। 
  • मृदा आवेदन या ड्रिप से रोको कवकनाशी का 2 से 4 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी (फूलों की क्यारियां/नर्सरी) के साथ घोल को मिट्टी में ड्रेंच करें।
  • PHT : 0.5 ग्राम/लीटर पानी में डुबोकर या छिड़काव करके छाया में सुखाएं।

आपको बायोस्टेट रोको कवकनाशी के उपयोग से फसल में उकठा या विल्ट रोग पर यह लेख पढ़कर कैसा लगा यह हमें कमेंट में बताना न भूलें और इस लेख को अपने अन्य किसान मित्रों के साथ भी शेयर करें। धन्यवाद 

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