green peas farming

green peas farming: बीजदर, उपयुक्त किस्में, खाद और उर्वरक की जानकारी

किसान भाइयों नमस्कार, स्वागत है BharatAgri Krushi Dukan वेबसाइट पर। मटर की खेती (green peas farming) एक महत्वपूर्ण कृषि फसल है इसे सब्जियों के लिए उत्कृष्ट माना जाता है। यह फसल कम समय में अधिक पैदावार देने वाली होती है और इसलिए व्यापारिक दलहनी फसल के रूप में भी जानी जाती है। आज के ब्लॉग में हम जानेंगे मटर की खेती कैसे करें (matar ki kheti kaise karen), मटर की बेस्ट किस्मे, बीजदर, बुवाई का समय, खेत की तैयारी, खाद और उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, सिंचाई के साथ सम्पूर्ण जानकारी और hybrid matar ki kheti से 20 से 25 क्विंटल / हेक्टर उपज का फार्मूला । 

मटर की खेती (Green pea farming in Hindi information) के लिए उपयुक्त मिट्टी, जलवायु, और तापमान के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि प्रति एकड़ ज्यादा और उत्तम पैदावार प्राप्त की जा सके। 


मिट्टी (Soil) -

मटर की खेती के लिए गहरी दोमट मिट्टी सबसे अधिक उपयुक्त है। यह मिट्टी पौधों को अच्छी से पोषण प्रदान करती है और अधिक पैदावार प्राप्त करने में मदद करती है। इसके अलावा, भूमि का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए, जो मटर के पौधों के लिए आदर्श है।


जलवायु (Climate) -

मटर की खेती के लिए समशीतोष्ण और उष्णकटिबंधीय जलवायु अच्छी मानी जाती है। भारत में, इसकी खेती रबी मौसम में की जाती है। ठंडी जलवायु में पौधे अच्छे से विकसित होते हैं, और सर्दियों में गिरने वाली तापमान से भी यह पौधा आसानी से निपट लेता है। मटर के पौधों को अधिक वर्षा की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन फिर भी नियमित आर्थिक सिंचाई की आवश्यकता होती है।


तापमान (Temperature) -

मटर का पौधा न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 25 डिग्री सेल्सियस के तापमान को सहन कर सकता है। पौधों को अंकुरित होने के लिए सामान्य तापमान में अच्छी तरह से प्रगति होती है, किंतु फलों के विकसन के लिए न्यूनतम तापमान की आवश्यकता होती है।


मटर की खेती की तैयारी। Land preparation for green peas farming -

मटर की खेती के लिए उपयुक्त भूमि की तैयारी बहुत महत्वपूर्ण है। सही तरीके से तैयार की गई भूमि से ही शुरुआत में सहारा मिलता है। यहाँ दी गई विधि का पालन करके आप मटर की खेत की अच्छी तरह से तैयारी कर सकते हैं।

👉मिट्टी की सही जाँचः सबसे पहला कदम यह है कि आपको अपनी मिट्टी की जाँच करनी चाहिए। इससे आप तो पता लग जायेगा की आप मिट्टी में कोन से पोषक तत्वों की कमी है और आप मिट्टी की जांच अनुसार किस खाद और उर्वरकों का उपयोग करना चाहियें पता लग जाये

👉खेत की जुताईः खेत की सबसे पहली जुताई गहरी जुताई करें ताकि पुरानी फसल के अवशेष सम्पूर्ण रूप से नष्ट हो सकें। इसके बाद, खेत को कुछ समय के लिए खुला छोड़े  ताकि धूप अच्छे से मिट्टी में पाएं जाने वाले फंगस, बैक्टीरिया, और कीटों का नियंत्रण हो सके।  

👉गोबर की खाद का उपयोगः पहली जुताई के बाद, खेत में 12 से 15 गाड़ी पुरानी गोबर की खाद को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से देना चाहिए। यह पौधों के लिए महत्वपूर्ण पोषण प्रदान करती है और भूमि की गुणवत्ता को बनाए रखती है।

👉पानी की व्यवस्थाः खेत को पानी से भरने के बाद, पलेवा का अनुप्रयोग करें। जब खेत की मिट्टी ऊपर से सूखी दिखाई दे, तब एक रोटावेटर का उपयोग करके खेत को फिर से जुताई दें। इससे खेत की मिट्टी और भी फुली हो जाएगी और शुरुआती रोपणी के लिए तैयार हो जाएगी।


खरपतवार का नियंत्रण | Best Herbicide for peas crop -

1. पौधों की देखभाल: बुवाई के 15-20 दिन बाद, खेत से घने पौधों को निकालें और उनकी आपसी दूरी 15 सेंटीमीटर रखें।

2. निराई और गुड़ाई: खेत में निराई और गुड़ाई करें।

3. रासायनिक उपाय: खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए, बुवाई के तुरंत बाद 2-3 दिनों के भीतर पेंडीमेथालीन 30 ईसी रसायन की 3.3 लीटर मात्रा को 600 से 800 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।


प्रमुख किस्मे | Best hybrid variety for green peas farming -

1. Advanta Golden (UPL )  Pea GS10 

2. Pahuja  Pea (PS - 1100 ) 

3. Shine  Seeds  SS10 (Imported)

4. Ajeet Seeds  AS-101 

5. Hyveg  Goldee Pea Seed

6. Shriram Saloni Pea Seeds 

7. Shriram Sweet Ruby Peas Seeds

8. Bioseed Veg Green Pea 10 Seeds


बीजदर प्रति एकड़ | Peas seed rate per acre -

मटर की खेती से ज्यादा उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रति एकड़ बीज की मात्रा पर ध्यान देना बहुत जरुरी है इस लिए आप को  10 - 12  किलोग्राम / एकड़ मटर के बीज की जरुरत होती हैं।  


बीजोपचार | Best seed treatment pea seeds -

बीज को बुआई के पूर्व फफूंदीनाशक वीटावैक्स पॉवर 3 ग्राम दवा प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें। इसके पश्चात एक किलो बीज में राइजोबियम कल्चर 4-5  मिली  तथा ट्राइकोडर्मा विरडी 2 - 3 मिली  मिलाकर उपचारित करें।


फसल में सिंचाई | Irrigation management in green peas farming -

मटर के पौधों की सही सिंचाई करना उनके स्वस्थ विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ दी गई विधि से आप मटर के पौधों की सही सिंचाई कर सकते हैं:

👉अंकुरण और पहली सिंचाई: - पौधों को नम भूमि में पौष्टिकता से अंकुरित करने के लिए, बीजों की अच्छी तरह से सोखी भूमि में बोना जाता है। पहली सिंचाई को बीज रोपाई के तुरंत बाद की जाती है, जिससे बीज नम भूमि में सही तरह से अंकुरित होते हैं।

👉नियमित सिंचाई की जरुरत: - समय समय पर पौधों को सिंचाई देना बहुत महत्वपूर्ण है। पहली सिंचाई के बाद, 15 से 20 दिनों के अंतराल में दूसरी सिंचाई की जानी चाहिए। इससे पौधों को आवश्यक पानी की मात्रा मिलती रहती है, जिससे वे स्वस्थ और सजीव रहते हैं।

👉सिंचाई की तकनीक: - सिंचाई के लिए कई तकनीकें हो सकती हैं, जैसे कि स्प्रिंकलर सिस्टम, ड्रिप आइरिगेशन, या किसानी नलकूप का उपयोग करना। जिस तरह की खेती और उपयुक्तता के हिसाब से, सही सिंचाई की तकनीक का चयन करना चाहिए।

👉मौसम की पर्याप्तता: - सिंचाई को मौसम की पर्याप्तता और बारिशों के हिसाब से नियमित रूप से किया जाना चाहिए। अचानकी बारिशों या सूखे के समय में सिंचाई को अच्छे से प्रबंधित करना चाहिए।


खाद और उर्वरक | Fertilizer management in green peas farming -

मटर की खेती के उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए, खेत की तैयारी में खास ध्यान देना चाहिए। खेत को बुआई से पहले, वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद को मिलाना चाहिए ताकि मिट्टी पौष्टिक बने। रासायनिक उर्वरक की मात्रा:

👉नाइट्रोजन: प्रति एकड़ में 20 किलो नाइट्रोजन का प्रयोग करें।

👉फास्फोरस: प्रति एकड़ में 25 किलो फास्फोरस का उपयोग करना चाहिए।

👉पोटाश: पोटाश की कमी वाले क्षेत्रों में, प्रति एकड़ में 20 किलो पोटाश का प्रयोग करें।


Conclusion | सारांश -  

इस ब्लॉग में हमने आप को मटर के खेती सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी दी है जैसे - मटर की खेती एक महत्वपूर्ण और लाभकारी कृषि फसल है जो सब्जियों के रूप में बहुत प्रमुख है। इसकी उच्च पैदावार और संशोधित किस्मों का चयन करके किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। मटर की खेती के लिए सही मिट्टी, जलवायु, और तापमान की जाँच करना महत्वपूर्ण है, और उपयुक्त उर्वरक और सिंचाई का प्रबंधन करना बहुत आवश्यक है। इसके अलावा, खरपतवार और कीट प्रबंधन का ध्यान देना चाहिए। यह सब तकनीकियाँ और नियमों का पालन करके किसान 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।


 FAQ | बार - बार पूछे जाने वाले सवाल -  


1. मटर की खेती के लिए सही मिट्टी क्या होनी चाहिए?

मटर की खेती के लिए गहरी दोमट मिट्टी सबसे अधिक उपयुक्त होती है, और मिट्टी का pH मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए.

2. मटर की खेती कब की जाती है?

मटर की खेती भारत में रबी मौसम में की जाती है.

3. मटर के बीज की मात्रा प्रति एकड़ क्या होनी चाहिए?

मटर की खेती के लिए प्रति एकड़ 10 - 12 किलोग्राम बीज की मात्रा की आवश्यकता होती है.

4. मटर की खेती में कौन-कौन से उर्वरक प्रयोग करें?

मटर की खेती के लिए वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद, नाइट्रोजन, फास्फोरस, और पोटाश का प्रयोग करना चाहिए.

5. मटर की खेती में कौन-कौन सी प्रमुख किस्में हैं?

कुछ प्रमुख मटर की खेती की किस्में हैं: Advanta Golden, Pahuja Pea, Shine Seeds, Ajeet Seeds, Hyveg Goldee Pea, Shriram Saloni Pea, Shriram Sweet Ruby Peas, Bioseed Veg Green Pea 10.

6. मटर की खेती में खरपतवार कैसे नियंत्रित करें?

खरपतवार को नियंत्रित करने के लिए पेंडीमेथालीन 30 ईसी रसायन का उपयोग करें।



लेखक | Author - 

भारतअ‍ॅग्री कृषि डॉक्टर

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